*पुलिसकर्मियों के परिवारों की खुशहाली से मजबूत होगा खाकी का मनोबल, डीजीपी कैलाश मकवाणा ने कल्याण को बनाया सर्वोच्च प्राथमिकता*

*परोपकार निधि की सहायता राशि 1 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये, दो वर्षों में करीब 19 से 20 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूर्ण एवं जारी, लगभग 28 हजार पुलिसकर्मियों को मिला पदोन्नति का लाभ; शिक्षा निधि से 1,694 बच्चों को 5.45 करोड़ की छात्रवृत्ति, दिशा लर्निंग सेंटर के जरिए 300 से अधिक बच्चों ने हासिल की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता*

*राजगढ़ ब्यावरा अमीन खान*
*MO:9752912286*
*अजनार की पुकार*
भोपाल। कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली खाकी वर्दी के पीछे एक ऐसा परिवार भी होता है, जिसकी खुशहाली, सुरक्षा और संतुष्टि सीधे तौर पर पुलिसकर्मी के मनोबल और कार्यक्षमता से जुड़ी होती है। ड्यूटी की कठिन परिस्थितियों, अनिश्चित कार्यघंटों और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियों के बीच पुलिसकर्मियों को यह भरोसा होना चाहिए कि उनके स्वास्थ्य, परिवार, बच्चों की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा की चिंता भी संगठन की प्राथमिकता है। इसी सोच को केंद्र में रखते हुए मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने पुलिसकर्मियों और उनके आश्रित परिवारों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का स्पष्ट संदेश दिया है। भोपाल में आयोजित राज्य संयुक्त पुलिस परामर्शदात्री समिति एवं पुलिस कल्याण समिति की वार्षिक बैठक में उन्होंने न केवल कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन, आर्थिक सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा, चिकित्सा सुविधाओं और सेवा परिस्थितियों में सुधार को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए।

आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के स्वर्ण जयंती सभागार में डीजीपी श्री कैलाश मकवाणा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का मूल संदेश स्पष्ट रहा कि पुलिस संगठन की मजबूती केवल अनुशासन और कानून-व्यवस्था के प्रदर्शन से नहीं, बल्कि अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों के प्रति संवेदनशीलता तथा जिम्मेदारी से भी तय होती है। बैठक में पुलिसकर्मियों एवं उनके परिवारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया और आवश्यक निर्णय लिए गए।
एक पुलिसकर्मी का परिवार भी संगठन की जिम्मेदारी
डीजीपी श्री मकवाणा ने कहा कि पुलिस एक अनुशासित वर्दीधारी संगठन है, लेकिन संगठन की वास्तविक ताकत उसके अधिकारी-कर्मचारी और उनके परिवार हैं। पुलिसकर्मियों का स्वास्थ्य, पारिवारिक संतुष्टि और आर्थिक सुरक्षा ऐसे महत्वपूर्ण विषय हैं, जिनका समय पर समाधान करना संगठन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कल्याणकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका लाभ प्रत्येक पात्र पुलिसकर्मी और उसके परिवार तक समय पर पहुंचना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पिछली बैठक में लिए गए अधिकांश निर्णयों का क्रियान्वयन किया जा चुका है। सभी इकाई प्रमुखों को निर्देश दिए गए कि वे कल्याणकारी योजनाओं की नियमित समीक्षा करें, पात्र हितग्राहियों की पहचान करें और किसी भी कर्मचारी अथवा उसके परिवार को योजनाओं का लाभ लेने में अनावश्यक परेशानी न हो, यह सुनिश्चित करें।
परोपकार निधि से अब 5 लाख रुपये तक मिलेगी सहायता
पुलिसकर्मियों और उनके आश्रित परिवारों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर बैठक में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। वर्ष 2025 की राज्य स्तरीय संयुक्त पुलिस परामर्शदात्री वार्षिक बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार परोपकार निधि से दी जाने वाली आर्थिक सहायता राशि को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जा चुका है। यह निर्णय आकस्मिक परिस्थितियों में प्रभावित पुलिस परिवारों को अधिक आर्थिक संबल देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
डीजीपी ने निर्देश दिए कि किसी पुलिसकर्मी की आकस्मिक मृत्यु अथवा अन्य विपरीत परिस्थितियों में उसके आश्रित परिवार को आर्थिक सहायता, बीमा दावों और अन्य देय लाभ प्राप्त करने के लिए अनावश्यक दस्तावेजी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े। इकाई स्तर पर ऐसे मामलों की नियमित निगरानी हो और परिवारों को हर जरूरी सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
दो वर्षों में करीब 20 हजार पदों पर भर्ती, 28 हजार पुलिसकर्मियों को पदोन्नति
पुलिस बल की कार्यक्षमता बढ़ाने, रिक्त पदों को भरने और कर्मचारियों पर कार्यभार कम करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए डीजीपी श्री मकवाणा ने बताया कि वर्ष 2025 एवं 2026 में लगभग 19 से 20 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूर्ण अथवा जारी है। आठ वर्ष के लंबे अंतराल के बाद उप निरीक्षक एवं सूबेदार संवर्ग की भर्ती कर उनका प्रशिक्षण भी प्रारंभ किया जा चुका है। इसके साथ ही कांस्टेबल चालक के 1,000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया की जा रही है।
लंबे समय से लंबित पदोन्नति के मामलों में तेजी लाते हुए विभिन्न संवर्गों के लगभग 28 हजार पुलिसकर्मियों को पदोन्नति प्रदान की गई है। अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का भी संवेदनशीलता के साथ निराकरण किया गया है। वहीं ईएचआरएमएस के अंतर्गत लीव मॉड्यूल प्रारंभ होने से अवकाश आवेदन और स्वीकृति की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। इससे पुलिसकर्मियों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुविधा मिल रही है।
पुलिस परिवारों के बच्चों की शिक्षा पर विशेष फोकस
पुलिसकर्मियों के बच्चों का भविष्य सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए संचालित शिक्षा निधि एवं दिशा लर्निंग सेंटर योजना को भी बैठक में विशेष महत्व दिया गया। जानकारी के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में अब तक शिक्षा निधि के अंतर्गत 1,694 पुलिसकर्मियों के बच्चों को लगभग 5 करोड़ 45 लाख रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई है।
वहीं शिक्षा निधि से जुड़े लगभग 1 लाख 26 हजार अंशदाताओं के परिवारों के 1,701 लाभार्थियों को लगभग 5 करोड़ 24 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई है।
प्रदेश की 86 पुलिस इकाइयों में दिशा लर्निंग सेंटर के पुस्तकालय संचालित हैं। इन केंद्रों के माध्यम से पुलिस परिवारों के बच्चों को पुस्तकालय, अध्ययन सामग्री और ऑनलाइन कोचिंग जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। पिछले वर्ष इन केंद्रों के माध्यम से 300 से अधिक बच्चों ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की।
डीजीपी ने निर्देश दिए कि दिशा लर्निंग सेंटर को केवल पुस्तकालय तक सीमित न रखा जाए, बल्कि बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जाए। जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ शिक्षकों को सीमित अवधि के लिए आमंत्रित करने, ऑनलाइन कोचिंग का अधिकतम उपयोग करने, स्पोकन इंग्लिश और अन्य उपयोगी विषयों पर विशेष प्रशिक्षण आयोजित करने तथा इकाई स्तर पर बच्चों की मांग के अनुसार कक्षाएं संचालित करने पर जोर दिया गया। उन्होंने पर्याप्त स्थान, बेहतर इंटरनेट सुविधा और पढ़ाई के लिए उपयुक्त समय उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर पहल
पुलिस की नौकरी में तनाव, दबाव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां लगातार बनी रहती हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर डीजीपी श्री मकवाणा ने विशेष संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों को गंभीरता से समझने और संस्थागत स्तर पर उनके समाधान के प्रयास करने की आवश्यकता है।
उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव की सराहना की। साथ ही हार्टफुलनेस संस्था के सहयोग से संचालित ध्यान एवं मानसिक स्वास्थ्य सत्रों की नियमित समीक्षा करने तथा योग, आसन और प्राणायाम जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। इसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों को मानसिक रूप से स्वस्थ, तनावमुक्त और कार्य के प्रति अधिक सक्षम बनाना है।
64 अस्पतालों में पुलिस हेल्थ प्लान, पैनल बढ़ाने पर विचार
पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पुलिस हेल्थ प्लान की समीक्षा भी की गई। वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत 64 अस्पताल अनुबंधित हैं, जिनमें 11 अस्पताल प्रदेश के बाहर स्थित हैं।
बैठक में पुलिसकर्मियों की जरूरतों को देखते हुए अस्पतालों का पैनल बढ़ाने तथा सीमावर्ती राज्यों के ऐसे अस्पतालों को योजना से जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया गया, जहां पुलिसकर्मी सामान्यतः उपचार के लिए जाते हैं।
इसके अलावा पुलिस सैलरी पैकेज योजना के अंतर्गत विभिन्न बैंकों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा की गई। डीजीपी ने निर्देश दिए कि पात्र पुलिसकर्मियों के वेतन खातों का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पीएसपी श्रेणी में पंजीकरण कराया जाए तथा उन्हें और उनके परिवारों को उपलब्ध बीमा लाभों की पूरी जानकारी दी जाए।
14 हजार से अधिक बालिकाओं को खोजकर बनाया रिकॉर्ड
बैठक में मध्यप्रदेश पुलिस की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए डीजीपी श्री मकवाणा ने बताया कि गत वर्ष प्रदेश पुलिस ने 14 हजार से अधिक बालिकाओं को खोजने में सफलता प्राप्त की। यह किसी एक वर्ष में बालिकाओं की खोज का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। उन्होंने प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, त्योहारों के शांतिपूर्ण आयोजन, संवेदनशील परिस्थितियों के प्रभावी प्रबंधन और विभिन्न अभियानों में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के योगदान की सराहना की।
नक्सल उन्मूलन की दिशा में पुलिस बल के प्रयासों को भी उन्होंने महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन प्रदान किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने जवानों के साहस, समर्पण और प्रतिबद्धता की प्रशंसा की।
नशामुक्ति अभियान में पांच पुलिस इकाइयों का सम्मान
नशामुक्त भारत के लक्ष्य को लेकर चलाए जा रहे अभियान को प्रभावी बनाने पर भी बैठक में विशेष जोर दिया गया। डीजीपी ने 'नशे से दूरी है जरूरी' अभियान के दोनों चरणों में पुलिस इकाइयों द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पांच पुलिस इकाइयों को सम्मानित किया।
इनमें इंदौर नगरीय एवं भोपाल नगरीय इकाइयों को पुलिस आयुक्त के नेतृत्व में व्यापक जनभागीदारी, प्रभावी संचालन और जागरूकता गतिविधियों के लिए सम्मानित किया गया। वहीं बालाघाट, बुरहानपुर और छिंदवाड़ा पुलिस इकाइयों को पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन, जनजागरूकता और सामुदायिक सहभागिता के लिए सम्मान मिला।
डीजीपी ने सम्मानित इकाइयों के अधिकारियों, कर्मचारियों और अभियान से जुड़े प्रत्येक सदस्य को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने अन्य पुलिस इकाइयों से भी इन प्रयासों से प्रेरणा लेकर नशामुक्ति के लिए निरंतर कार्य करने का आह्वान किया।
खेलों में प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ाने पर जोर
पुलिस परिवारों के बच्चों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित खेल प्रोत्साहन योजना की भी समीक्षा की गई। राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पात्र बच्चों की पहचान कर उन्हें योजना का लाभ दिलाने के लिए सक्रिय प्रयास करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में पुलिस स्कूलों एवं स्वस्ति चिकित्सालय से संबंधित प्रस्तावों सहित पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के हित से जुड़े अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई। विभिन्न इकाइयों के अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत सुझावों पर संबंधित शाखाओं को परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
शोक श्रद्धांजलि के साथ शुरू हुई बैठक
वार्षिक बैठक की शुरुआत देवास जिले के खातेगांव थाना प्रभारी निरीक्षक श्री दिलीप पुरी के कर्तव्य निर्वहन के दौरान गत रात्रि हुए आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त कर की गई। उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत अधिकारी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
बैठक में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कल्याण) श्री सोलोमन यश कुमार मिंज ने पुलिस मुख्यालय स्तर पर संचालित प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं एवं उनकी प्रगति का प्रस्तुतिकरण दिया।
इस अवसर पर विशेष पुलिस महानिदेशक सीआईडी श्री पंकज श्रीवास्तव, विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशासन श्री आदर्श कटियार, विशेष पुलिस महानिदेशक महिला सुरक्षा श्री अनिल कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री डी. श्रीनिवास वर्मा, पुलिस आयुक्त भोपाल श्री संजय कुमार, पुलिस आयुक्त इंदौर श्री संतोष सिंह सहित पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा प्रदेश की विभिन्न पुलिस इकाइयों से आए अधिकारी उपस्थित रहे।
खाकी के पीछे खड़े परिवारों को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का भरोसा देना ही मजबूत पुलिस संगठन की असली पहचान है। डीजीपी श्री कैलाश मकवाणा की अध्यक्षता में हुई यह बैठक इसी सोच को योजनाओं, निर्णयों और जमीनी क्रियान्वयन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई।
प्रधान संपादक,, अमीन खान,, राजगढ़ ब्यावरा,,मध्य प्रदेश,,हिंदी समाचार पत्र,,{अजनार की पुकार} 97529 12286