आज नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी कार्यालय में मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी श्री हरीश चौधरी, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार एवं मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार सुश्री मीनाक्षी नटराजन ने महत्वपूर्ण संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्री अशोक सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्री अजय सिंह जी, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री अरुण यादव, CWC सदस्य श्री कमलेश्वर पटेल, CEC सदस्य श्री ओमकार मरकाम, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष श्री राजेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री श्री सज्जन सिंह वर्मा, पूर्व सांसद श्रीमती विजयलक्ष्मी साधौ, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विक्रांत भूरिया सहित कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं विधायक उपस्थित रहे।
*प्रदेश प्रभारी श्री हरीश चौधरी ने कहा कि* देश के सामने एक सवाल था कि क्या देश ऑटोक्रेसी की तरफ जा रहा है, मगर आज उस सवाल का जवाब देश को मिल चुका है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग संवैधानिक व्यवस्था के तहत निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन इस व्यवस्था को बदल दिया गया है। नरेंद्र मोदी ने चुनाव आयोग के कमिश्नर को चुनने की प्रक्रिया से देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाकर अपने एक मंत्री को उसमें शामिल किया। इस व्यवस्था परिवर्तन के बाद सरकार जिसे चाह रही है, उसे नियुक्त कर रही है। आज तमाम संवैधानिक व्यवस्थाओं को कमजोर कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि संवैधानिक मॉडल के तहत राज्यसभा चुनाव के लिए मीनाक्षी नटराजन जी ने नामांकन भरा था। नियम-कानूनों के अनुसार नामांकन दाखिल किया गया था, लेकिन बाद में उसे निरस्त कर दिया गया।
*प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी ने कहा कि* मीनाक्षी नटराजन जी के नामांकन मामले में रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका संदिग्ध रही है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी एक विधायक की सदस्यता के मामले में उनकी भूमिका सवालों के घेरे में रही थी।
उन्होंने कहा कि जब भाजपा के तीन राज्यसभा सांसद चुने गए तो रिटर्निंग ऑफिसर सुबह 8:30 बजे ही कार्यालय पहुंच गए थे, लेकिन जब कांग्रेस नेता एवं विधायक नामांकन निरस्त करने के विरोध में भोपाल स्थित चुनाव आयोग कार्यालय के सामने बैठे रहे, तब कोई संज्ञान नहीं लिया गया और उन्हें कहा गया कि रिटर्निंग ऑफिसर सुबह 11 बजे मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर का यह रवैया लोकतंत्र पर एक काला धब्बा है। इसी मामले को लेकर केसी वेणुगोपाल जी के नेतृत्व में कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली स्थित केंद्रीय चुनाव आयोग कार्यालय भी पहुंचा था, जहां आवेदन दिए जाने के बावजूद कोई संज्ञान नहीं लिया गया और न ही कोई निर्देश प्राप्त हुए। यह पूरा रवैया लोकतंत्र को कमजोर करने वाला है।
*नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने कहा कि* देश में जिस प्रकार की परिस्थितियां बन रही हैं, उसके कारण देश इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि स्वीडन की एक यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि विश्व के कई देश चुनावी सत्तावाद की ओर बढ़ रहे हैं, जहां केवल नाम का विपक्ष और नाम की स्वतंत्र मीडिया बचती है।
उन्होंने कहा कि कार्यपालिका का केंद्रीकरण, विधायिका की कमजोर निगरानी, आम नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक और पत्रकारों के उत्पीड़न जैसे हालात आज देश में देखने को मिल रहे हैं। इन परिस्थितियों पर गंभीर चिंतन करने की आवश्यकता है।
*राज्यसभा उम्मीदवार सुश्री मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि* उन पर राज्यसभा नामांकन के फॉर्म-26 में जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया, जबकि फॉर्म-26 में राजनीतिक दल की जानकारी, मतदाता सूची में क्रमांक, संपर्क विवरण, पैन एवं आयकर रिटर्न, संपत्ति का विवरण, लंबित आपराधिक मामलों एवं दोष सिद्ध मामलों की जानकारी मांगी जाती है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने फॉर्म-26 में स्पष्ट जानकारी दी थी कि उन पर ऐसा कोई आपराधिक मामला लागू नहीं होता, क्योंकि जिस कानूनी नोटिस का उल्लेख किया जा रहा है, उस पर न्यायालय ने संज्ञान तक नहीं लिया है।
उन्होंने कहा कि फॉर्म-26 में ऐसा कोई कॉलम नहीं था, जिसमें प्राइवेट कंप्लेंट की जानकारी देना आवश्यक बताया गया हो। यदि ऐसा कोई प्रावधान या कॉलम होता, तो वह जानकारी अवश्य दी जाती।
उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह स्पष्ट है कि न तो नामांकन फॉर्म में कोई कमी थी और न ही मांगी गई किसी जानकारी को छिपाया गया था। फॉर्म-26 के तहत जो भी जानकारी अपेक्षित थी, वह पूरी पारदर्शिता के साथ प्रस्तुत की गई।