राजगढ़

बाहर से आए दुकानदारों के साथ दुकान के नाम पर जम के मची लूट। राजगढ़ उर्स लगने से पहले ही अनियमितताओं का दौर हो गया था शुरू. 2026 के उर्स में कमेटी के लोगों ने मचाई थी जमकर लूट।

राजगढ़

*बाहर से आए दुकानदारों के साथ दुकान के नाम पर जम के मची लूट।*


*राजगढ़ उर्स लगने से पहले ही अनियमितताओं का दौर हो गया था शुरू.*


 *2026 के उर्स में कमेटी के लोगों ने मचाई थी जमकर लूट।*

 

*जीसकी शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक भी जागरूक लोगों द्वारा की गई थी।*


 *उर्स समापन के बाद झूले वालों के 5 दिन और बड़वाने के नाम पर भी झूले वालों से अलग से एठे 5-5 लख रुपए जिसके वीडियो हुए थे वायरल।*

 

 जिले में स्थित सूफी बाबा बदख्सानी रहमतुल्लाह अलैह के यहां होने वाले सालाना उर्स मुबारक का आगाज मार्च माह की 10 तारीख से होता है। बता दें कि तत्कालीन 2023 की रेगुलर प्रबंधन कमेटी जो की मोहम्मद शफीक गाम के नेतृत्व में लगातार अपने कार्य को अंजाम दे रही थी जबकि वक्फ बोर्ड ने उर्स मुबारक संपन्न करने के लिए सफीक गामा कि सदारत वाली  प्रबंधन कमेटी को नोटिफिकेशन जारी करते हुए आदेश किया था कि उर्स संपन्न करने के लिए झूले,लाइट,सफाई,पानी,पार्किंग,जैसी सभी टेंडर के लिए विज्ञप्ति जारी की जाए जिससे कि आने वाले उर्स में किसी भी तरह से कोई परेशानी का सामना न करना पड़े। वक्फ बोर्ड के पालन में तत्कालीन समिति ने विज्ञप्तियां जारी करते हुए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी थी जबकि टेंडर की समय सीमा तक जो बिजली झूले एवं पार्किंग के जो टेंडर आए थे वह टेंडर होने की अंतिम तारीख के पहले वक्फ बोर्ड ने फिर से एक फरमान जारी कर दिया जिसमें वक्फ बोर्ड ने एक नइ कमेठी गठित कर दिया,जबकि पूर्व की तत्कालीन शफीक गामा वाली कमेटी का 4 माह का कार्यकाल बाकी था।
वक्फ बोर्ड ने जैसे ही नई कमेटी की घोषणा कर दी इसके बाद जब राजगढ़ में हलचल का दौर शुरू होगया था। बता दें कि पूर्व कमेटी के द्वारा किए गए सभी टेंडर को नवनियुक्त कमेटी ने निरस्त कर दिया था,जबकि नियम अनुसार पूर्व कमेटी को वक्फ बोर्ड ने आदेशित किया था कि टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के लिए विज्ञप्ति जारी कर टेंडर करवाया जाए इसी के चलते पूर्व कमेटी ने सुचारू रूप से अपने कार्य को अंजाम देते हुए सभी प्रक्रियाएं सतत जारी रखी। पूर्व कमेटी के सदर सफीक गाम से आखीर चार माह बाकी होने के पहले ही इस्तीफा क्यों ले लिया गया और अगर इस्तीफा अगर लेना ही था तो उन्हें उर्स करने के लिए टेंडर एवं विज्ञप्तियों के लिए बोर्ड ने क्यों नोटिफिकेशन जारी किया। लेकिन बड़ी बात तो यह है कि जब नवगठित कमेटी ने जैसे-जैसे काम शुरू किया तो अनेकों अनियमिताएं देखने में सामने आने लगी उर्स के पहले बाबा हुजूर की गुंबद का कलश उतारा जाता है एवं गुसल के बाद वापस कलश शरीफ चढ़ाया जाता है, उसमें कलश को अदब एतराम करते हुए उतरते हैं। बाबा हुजुर पर आस्था रखने वाले लोग उस कलश को उतारते हुए चुमकर एवं अपना सरताज बनाकर सर से लगाकर अदब के साथ उसको आगे बढ़ाया जाता है लेकिन यह रस्म नवगठित कमेटी के सदर ने नहीं किया जिससे शहर के कई लोग नाराज हुए एवं शहर वासियों का कहना है कि बाबा हुजूर के यहां जो खादिम सदर बनता है वह सुफियों पर अकीदा रखने वाला होना चाहिए। लेकिन यहां पर तत्कालीन वक्फ बोर्ड ने जो सदर बनाया है वह जमाती लाइन का व्यक्ति है जो पूर्व से मस्जिद में नमाज पढ़ाकर इमामत करते थे। वह बाबा हुजूर पर एवं सूफियाना पर अपना अकीदा नहीं रखते हैं, यह लोग बाबा हुजूर के यहां कदम बोसी एवं चादर चुमने को सिर्क कहते हुए इसका विरोध करते हैं, लेकिन वक्फ बोर्ड ने उसी को वक्फ संपत्ति बाबा  बदख्शांनी रहमतुल्लाह आले के यहां सदर बना कर भेज दिया।लेकिन जैसे ही नव गठीत कमेटी के मेंबरों ने ग्राउंड में काम करना शुरू किया दुकानों के एलार्ट के नाम से अवैध पैसों की वसूली के आरोप लगने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर आने लगे, उर्स सम्पन के पहले जब दुकानदारों को वक्फ संपति पर दुकान एलार्ट की जाती हैं उन दुकानों में बड़ा भ्रष्टाचार सामने आने लगा था जिसमें दुकानदार ने आरोप लगाये हैं कि नवगठित कमेटी ने पूर्व की सभी कमेटियों से ज्यादा लूटपाट शुरू कर दी है। कुछ दुकानदारों का कहना यह भी है कि हमें पूर्व से जो 7000 में जगह मिल रही थी उस जगह का 80000 और डेढ़ लाख रुपए तक की डिमांड कर रहे हैं। पैसे नहीं देने पर हमें यह कहकर भगाया जा रहा है कि चले जाओ तुम्हारा कोई यहां पट्टा नहीं है, जबकि राजगढ़ बाबा हुजूर के उर्स में सभी आस्थ के हिसाब से अपनी दुकान लेकर आते हैं कि बाबा हुजूर के मेले में कुछ कमाई होगी जिससे कि परिवार का भरण पोषण सुचारू रूप से चलेगा। लेकिन नवगठित कमेटी ने तो सभी हदें पार करत दी. राजगढ़ के ही निवासी कुछ लोगों का कहना है कि विधिवत पूर्व कमेटी ने विज्ञप्ति जारी करते हुए जो टेंडर कराए थे उसमें हमने भी भाग लिया था। जिसमें मेरा टेंडर को नवगठित कमेटी ने अपने निजी स्वार्थ के लिए निरस्त कर दिया है जबकि मेरा टेंडर वर्तमान टेंडर से ज्यादा था। आपको बता दें कि उर्स समापन की तारीख के बाद जब झूले वालोँ ने मीडिया से चर्चा करते हुए  बताया कि हमसे तत्कालीन 2026 की कमेटी वालों ने 5_5 लाख लेकर 5 दिन और बड़वाने को कहा था जिसके नाम पर पांच, 5_5 लाख और  हमसे लिए हैं, जिसके वीडियो भी हमारे पास सुरक्षित है,,

 

,,इनका क्या है कहना,,

,, जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्र सिंह सोंधिया,,

,, देखें वीडियो,,

 

 

 

( *4 माह बाकी होने पर भी नई कमेटी का कर दिया गठन*)

लेकिन हद तो जब हो गई कि वक्फ बोर्ड ने पूर्व की कमेटी के चर माह बाकी होने पर भी एक नई कमेटी पैराशूट से उतार दी। नव गठित कमेटी ने पूर्व कमेटी से अपना हिसाब किताब मांगना शुरू कर दिया और पूर्व कमेटी के द्वारा किए गए समी टेंडर को निरस्त करते हुए अपने निजी मनगढ़त कहानी बनाकर निजी स्वार्थ के लिए मनगढंत टेंडर करना शुरू कर दिए। लेकिन जब मेले का दिन करीब आने लगा वैसे ही शहर में मुस्लिम समुदाय के लोगों में रोस सा छा गया था और दबी जुबान से सब वक्फ बोर्ड का विरोध करने पर उतारू हो गए। सूत्रों के मुताबिक बताया जा रहा है कि नवगठित कमेटी का राजगढ़ तत्कालीन विधायक एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने अनुशंसा की थी लेकिन सूत्रों के मुताबिक नवनियुक्त सदर इलियास भारतीय जनता पार्टी से दूर-दूर तक किसी भी प्रकार से कोई ताल्लुक नहीं रखता है, ऐसे व्यक्ति की सिफारिश भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने कर डाली, यह समझ के परे है, बताया जा रहा है कि मेले में आए हुए हिंदू व्यापारियों को कमेटी के लोगों ने दुकान देने से इनकार करते हुए वहां से पैसों की बड़ी डिमांड करते हुए भगा दिया,