राजगढ़

छात्रों की गूंज” के ‘संविधान संवाद’ में छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था, निजीकरण और छात्र राजनीति पर कन्हैया कुमार से किया संवाद।

राजगढ़

 

भोपाल।
कांग्रेस के “छात्रों की गूंज” अभियान के अंतर्गत रविवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय के समीप स्थित सिंधु भवन में “संविधान संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम में कांग्रेस के प्रखर वक्ता एवं एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी श्री कन्हैया कुमार ने प्रदेशभर से पहुंचे सैकड़ों छात्र-छात्राओं और युवाओं से संवाद किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था, सरकारी योजनाओं, शैक्षणिक संस्थानों के निजीकरण, नीट पेपर लीक, छात्र राजनीति, सहित विभिन्न विषयों पर कन्हैया कुमार से सवाल किए और अपने विचार साझा किए। छात्रों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ती अनियमितताओं, बढ़ती फीस और युवाओं के भविष्य को लेकर अपनी चिंताएं भी व्यक्त कीं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री कन्हैया कुमार ने कहा, “राहुल गांधी पिछले दस वर्षों से अधिक समय से देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार, युवाओं को बेहतर अवसर और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश केंद्र सरकार छात्रों और युवाओं की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं है। आज देश का विद्यार्थी पेपर लीक, निजीकरण, बढ़ती फीस और बेरोजगारी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। संविधान के मूल्यों और शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए युवाओं को आगे आना होगा।” 

AICC कॉर्डिनेटर एवं “छात्रों की गूंज” अभियान के समन्वयक डॉ. अंशुल त्रिवेदी ने कहा, “यह अभियान देश के विद्यार्थियों की आवाज़ को एक मंच देने का प्रयास है। आज आदिवासी, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से आए युवाओं ने खुलकर अपने विचार रखे। शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा साधन है और इसी उद्देश्य से ‘छात्रों की गूंज’ अभियान चलाया जा रहा है।”
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर युवाओं की भागीदारी पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गई है और यह अभियान छात्रों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अवसर प्रदान कर रहा है।

NSUI प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने कहा, “‘छात्रों की गूंज’ अभियान के माध्यम से प्रदेश के छात्र-युवा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को मजबूती से उठा रहे हैं। छात्रों के हितों और उनके अधिकारों की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।” उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए छात्रों की भागीदारी और संवाद आवश्यक है तथा युवाओं की आवाज़ को दबाने के बजाय उसे सुना जाना चाहिए।

कार्यक्रम में विभिन्न छात्र संगठनों के पदाधिकारियों एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लया।